सरचार्ज माफी योजना से इस बार उम्मीदें ज्यादा

Dhun Pahad Ki

उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को मिल रही है विलंब अधिभार से छूट
देहरादून। करीब आठ लाख बिजली उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर लाई गई सरचार्ज माफी योजना से इस बार ज्यादा उम्मीदें हैं। पिछले वर्ष की शुरूआत में भी इस तरह की योजना राज्य सरकार लाई थी, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं मिले थे। इसकी वजह, उस वक्त राजनीतिक नेतृत्व परिवर्तन के कारण उपजी स्थिति को भी माना गया। मगर इस बार चुनावी माहौल के बीच इस योजना को मार्च 2022 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। ऐसे में अच्छे नतीजे निकलने की उम्मीद प्रबल है।
दरअसल, राज्य सरकार ने एक मई से 31 दिसंबर 2021 तक के लिए सरचार्च माफी योजना शुरू की है। बिजली के बिलों को लंबे समय से न चुकाने के कारण तमाम उपभोक्ताओं के मूल बिल पर भारी भरकम विलंब शुल्क यानी सरचार्ज लग गया है। सरकार ने तीन-तीन महीने के दो चरणों में इस योजना को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए शर्त ये है कि उपभोक्ता को सरचार्ज हटाकर बिल की बाकी रकम एकमुश्त भरनी होगी। इस तरह की योजना को राज्य सरकार ने पिछले साल की शुरूआत में तब लागू किया था, जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री थे और ऊर्जा महकमा भी खुद ही देख रहे थे। त्रिवेंद्र सरकार इस योजना को बहुत अच्छे ढंग से लागू करने के लिए प्रयास कर रही थी। इससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलती और विभाग का राजस्व भी बढ़ता, लेकिन अचानक से मुख्यमंत्री बदल दिए जाने का योजना पर बुरा असर पड़ा। त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत आए, जिन्हें इस योजना को अच्छे से लागू कराने के लिए समय ही नहीं मिल पाया। 18 मई 2021 को यह योजना बंद हुई और उससे पहले ही कोरोना का कहर भी विकराल रूप धारण कर चुका था। सारी स्थितियों की मार योजना पर पड़ी और अच्छे नतीजे नहीं मिले।
पुष्कर सिंह धामी सरकार भी विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इस योजना को लेकर आई। पहले इसे 31 दिसंबर 2021 तक लागू किया गया, लेकिन फिर इसे 31 मार्च 2022 तक विस्तारित कर दिया गया। इस बार स्थितियां बदली हुई हैं और काफी हद तक अनुकूल हैं। कोरोना का कहर हालांकि धीरे धीरेे बढ़ता हुआ दिख रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में काफी शांति रही और राजनीतिक उठा-पटक भी नहीं रही। इसके अलावा, धामी सरकार में मुख्यमंत्री पर ही ऊर्जा महकमे की जिम्मेदारी नहीं है और डा हरक सिह रावत इस दायित्व कोे संभाल रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार इस योजना की ठोस माॅनीटरिंग संभव हो पाएगी। अधिशासी अभियंता से लेकर अधीक्षक अभियंता तक को जिम्मेदारी बांट दी गई है। हालांकि चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के बाद ऊर्जा निगम के अफसर इस योजना पर कितना फोकस कर पाएंगे, ये बात भी अपनी जगह पर है।

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