बनती-बिगड़ती बातों केे बीच बन ही गई याद आली टिहरी

Dhun Pahad Ki

आंचलिक फिल्मों की दिलचस्प कहानी

-याद आली टिहरी यानी याद आएगी टिहरी। वैसे, तो टिहरी से सरोकार रखने वाले हर एक शख्स को टिहरी हमेशा याद आएगी, लेकिन यहां पर हम बात कर रहे हैं अनुज जोशी की गढ़वाली फिल्म याद आली टिहरी की। अनुज जोशी की यह फिल्म टिहरी केे दर्द को उकेेरती है और इस काम में मददगार बने हैं, उनके दो मजबूत साथी मदनमोहन डुकलान और आलोक मलासी। टीम वर्क का बेहतरीन नमूना याद आली टिहरी है, जिसमें तीनों लोगों ने कई-कई दायित्व निभाए हैं। मसलन, अनुज जोशी यदि निर्देशक हैं, तो साथ में कथा-पटकथा भी उन्हीं लिखी है। इसी तरह, मदनमोहन डुकलान गीतकार तो हैं ही, साथ में फिल्म के हीरो भी हैं। आलोक मलासी की बात कर लें, तो संगीतकार होने के साथ-साथ फिल्म के दो सबसे अच्छे गीत जरा मठु मठु और पाणी उन्हीं की आवाज में है। यही नहीं, एक छोटी सी भूमिका में वह पर्दे पर भी दिखाई देते हैं। याद आली टिहरी में टिहरी केे डूबने से पहले और बाद के कई दृश्य दिखते हैं, जो उद्वेलित कर जाते हैं। यह फिल्म बामुश्किल तैयार हुई है। करीब 55 फीसदी शूटिंग हो जाने के बाद फिल्म का निर्माण बंद हो गया था। बजट का अभाव एक बड़ा कारण रहा। मगर, इसकेे बाद इस अभियान को दोबारा शुरू किया गया और फिर फिल्म पर्दे तक पहुंच गई।

 

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