उदित नारायण से गढ़वाली गाना सुन मंत्रमुग्ध हो गए अनूप जलोटा

Dhun Pahad Ki

आंचलिक फिल्मों की दिलचस्प कहानी

-उत्तराखंडी सिनेमा के साथ बाॅलीवुड के कई नामचीन गायकों का जुड़ाव रहा है, लेकिन सबसे पुराने जुड़ाव की बात करें, तो उदित नारायण का नाम सामने आता है। उदित नारायण ने कई गढ़वाली फिल्मोेें के लिए पाश्र्व गायन किया है। और तो और पहली गढ़वाली फिल्म जग्वाल के पाश्र्व गायक भी उदित नारायण ही थे। जग्वाल में उदित नारायण को मौका मिलने की दिलचस्प कहानी है। 1983 में जग्वाल रिलीज हुई। निर्माता पाराशर गौड़ ने निर्देशन और संगीत निर्देशन दोनों ही अहम दायित्वों के लिए नेपाली मूल के तुलसी धिमिरे और रणजीत गजमीर को चुना। संगीतकार रणजीत गजमीर ने एक दिन पाराशर गौड से गायक बतौर उदित नारायण की सिफारिश कर दी। उन दिनों उदित नारायण फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। तय हुआ कि एक बार उदित नारायण को बुलाकर उनसे कुछ सुन लिया जाए। पसंद आए, तो उन्हें ही मौका देंगे। उदित नारायण ने गाया, तो सभी प्रभावित हुए बगैर नहीं रहे। इसके बाद, उन्होंने ही जग्वाल के लगभग सभी गाने गाए। इस फिल्म के निर्माण में पाराशर गौड़ के सहयोगी उनके दोस्त शिवनारायण रावत थे। बाद में शिवनारायण रावत ने नेपाली फिल्म कुसुमे रूमाल को डब करके गढ़वाली में प्यारू रूमाल बनाई। इस फिल्म में उदित नारायण गायक ही नहीं, बल्कि हीरोे भी थे। शिवनारायण रावत एक रोचक किस्सा बताते हैं। हुआ यूं कि प्यारू रूमाल के लिए उदित नारायण एक गाना रिकार्ड करा रहे थे। तब ही वहां पर भजन सम्राट अनूप जलोटा पहुंच गए। उस वक्त अनूप जलोटा लोकप्रियता के शिखर पर थे, जबकि उदित नारायण की खास पहचान नहीं बन पाई थी। उन्होंने स्टूडियो में गाते हुए उदित नारायण के बारे में पूछा। उन्हें बताया गया कि यह नया सिंगर है। तब तक गाना खत्म करके उदित नारायण स्टूडियो से बाहर आ गए। अनूप जलोटा को देखते ही उन्होंने उनके पैर छू लिए। जलोटा ने उन्हें गले लगा लिया और कहा-तुम एक दिन बहुत सफल होंगे। यह वर्ष 1958 का वाक्या है और पूरी दुनिया ने देखा कि 1988 में कयामत से कयामत तक फिल्म के लिए पाश्र्व गायन करके उदित नारायण ने अपना नाम किस तरह बड़ा कर लिया। उदित नारायण ने जग्वाल, प्यारू रूमाल ही नहीं, बल्कि बंटवारू, फयोली जैसी गढ़वाली फिल्मोें में भी गाने गाए हैं।

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