केदारनाथ पर किसका काम बोलेगा वोटरों के सर चढ़कर

Dhun Pahad Ki

केदारपुरी को संवारने में मोदी, हरीश, कोठियाल की रही अहम भूमिका
देहरादून। उत्तराखंड में चुनाव का शंखनाद हो चुका है। चुनावी समर में इस बार केदारनाथ आपदा और उसके बाद पुनर्निर्माण की कवायद में प्रमुख सियासी दलों के योगदान की चर्चा काफी आगे तक जा रही है। भाजपा, कांग्र्रेेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी इस चर्चा के केंद्र में है। ऐसे में सवाल ये ही है कि चुनाव में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण के सवाल पर वोटर किसके पक्ष में खड़ा दिखाई देगा।
भाजपा की सबसे पहले बात करे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ पुनर्निर्माण के लिए किए गए सबसे बडे़ प्रयास साफ नजर आते हैं। केदारनाथ आपदा के बाद की स्थितियों में प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर दिलचस्पी दिखाते हुए इस पवित्र धाम की सूरत ही बदल डाली है। अब पहले से भव्य केदारनाथ दुनिया को नजर आता है। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी संसदीय सीट से प्रत्याशी होते हुए मोदी ने अपनी साधना के लिए केदारनाथ को चुना तो पूरी दुनिया का ध्यान उत्तराखंड की तरफ गया। मोदी केदारनाथ धाम के सबसे बडे़ ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे। इसका नतीजा तुरंत दिखाई भी दिया और कोराना काल से पहले की चार धाम यात्रा के दौरान केदारनाथ पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या ने पहली बार दस लाख का आंकड़ा छुआ। जाहिर तौर पर केदारनाथ पुनर्निर्माण में मोदी के योगदान को भाजपा अपनी सबसे बड़ी ताकत मान कर चल रही हैै।
अब बात कांग्रेस से दिग्गज नेता हरीश रावत और आम आदमी पार्टी से उनके सीएम पद के चेहरे कर्नल अजय कोठियाल की करेंगे। अजब स्थिति देखिए, वर्ष 2013 में केदारनाथ त्रासदी के बाद पुनर्निर्माण के कार्य की शुरूआत में हरीश रावत और कर्नल अजय कोठियाल के तालमेल ने असाधारण कार्य को अंजाम दे दिया था, लेकिन आज दोनों ही सियासी पिच पर अपने-अपने योगदान की चर्चा करते हुए वोटरों का दिल जीतने के लिए बल्लेबाजी कर रहे हैं। दरअसल, केदारनाथ त्रासदी के बाद यह सवाल सबसे बड़ा था कि भारी जान माल के नुकसान के बाद क्या 2014 में चार धाम यात्रा को सरकार शुरू करने की स्थिति में होगी। हरीश रावत सरकार के सामने ढेरों चुनौतियां खड़ी थीं। हरीश रावत सरकार ने राज्य सरकार की तमाम सरकारी एजेंसियों की बजाए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के जवानों और उनके तत्कालीन मुखिया कर्नल अजय कोठियाल पर भरोसा जताया था। हरीश रावत को यह श्रेय जाता है कि प्रदेश में उनके नेतृत्व में केदारनाथ पुनर्निर्माण की ठोस शुरूआत हुई और असंभव सी दिखने वाली स्थितियों के बीच चार धाम यात्रा 2014 में संचालित की गई। बहुत बड़ा श्रेय कर्नल अजय कोठियाल के हिस्से में भी है कि उन्होंने केदारनाथ में आपदा, राहत और पुनर्निर्माण के बेहद मुश्किल टास्क को स्वीकार करते हुए उसे अंजाम तक पहुंचाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से जिस तरह का लगाव है, उसमें केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य की रोशनी में वह जरूर चाहेंगे, कि देवभूमि में फिर से कमल निशान ही खिलता हुआ दिखाई दे। 2017 के चुनाव में पार्टी और अपनी खुद की शर्मनाक हार के बाद हरीश रावत के लिए 2022 का चुनाव खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से पाने का एक अवसर है। उनकी पार्टी के भीतर टांग खिंचाई चरम पर है, लेकिन एक बेहद मंझे हुए राजनेता होने की वजह से हरीश रावत चीजों को अपने हिसाब से संवारने में जुटे हैं। कर्नल अजय कोठियाल एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उनका काम उनकी पहचान है, लेकिन राजनीतिक पैंतरेबाजी और वो भी चुनावी माहौल के बीच, किस तरह वह अरविंद केजरीवाल के भरोसे पर खरा उतरेंगे, ये देखने वाली बात है। तीनों ही नेता केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण के सवाल पर अपने दावे के साथ मैदान में होंगे, फैसला जनता को करना है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

Jeux Avec unique casino Ladbrokes Salle de jeu

Ravi Admiral Sur internet Wedden Situation 50 Espaces Sans frais Sans avoir í  Archive Périodes Sans frais Avec Salle de jeu : Quels Éditeurs En Proposent Les bons ? Périodes Gratis Prime De Salle de jeu Canada 2022 , chacun pourra avoir à faire le classe à un pressant gratis, ou […]

Subscribe US Now