दार्जिलिंग की चाय के लिए खतरा बनी नेपाली चाय, जानिए क्यों बढ़ रहा है संकट

Dhun Pahad Ki

दार्जिलिंग चाय अपने खास स्वाद और सुगंध के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इन खासियतों की वजहों से ही इस चाय को जीआई टैग भी मिला है। लेकिन अब पड़ोसी नेपाल से आने वाली ‘घटिया’ क्वॉलिटी की चाय इसकी पहचान के लिए खतरा बन रही है। नेपाल से मुक्त व्यापार समझौते के तहत आने वाली चाय भारतीय बाजारों में दार्जिलिंग चाय के नाम पर बेची जा रही है।

दार्जिलिंग के चाय उत्पादकों ने इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा टी बोर्ड को भी पत्र भेजा है। कुछ उत्पादकों का आरोप है कि नेपाल चीन से आयातित घटिया किस्म की चाय भारतीय बाजारों में भेज रहा है। नेपाल से चाय की बढ़ती आवक और उपलब्धता ने प्रतिष्ठित दार्जिलिंग चाय की कीमतों पर सीधा असर डाला है।

एक साल के दौरान इसकी कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। उद्योग से जुड़े लोगों का आरोप है कि खास तौर पर व्यापारियों का एक तबका नेपाल की चाय को दार्जिलिंग चाय के रूप में बेच रहा है। कानूनी तौर पर मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत में कोई भी नेपाल से स्वतंत्र रूप से चाय का आयात कर सकता है। हालांकि थोक बिक्री में दार्जिलिंग चाय की कीमत प्रति किलोग्राम औसतन 320 से 360 रुपये के बीच रहती है। लेकिन नेपाल की परंपरागत किस्म वाली चाय की कीमत इसकी आधी से भी कम होती है।

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