नए-पुराने चेहरों का साथ, मिशन 2024 की चुनौती

Dhun Pahad Ki

धामी मंत्रिमंडल में अनुभव और जोश के संतुलन की कोशिश

विपिन बनियाल
-उत्तराखंड में नए-पुराने चेहरों के साथ पुष्कर सिंह धामी सरकार वजूद में आ गई है। एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता संभालने वाली धामी सरकार के सामने अब मिशन 2024 की चुनौती है। यही वजह है कि धामी मंत्रिमंडल में अनुभव और जोश दोनों का तालमेल बिठाने की कोशिश की गई है। इस कोशिश में कई प्रमुख चेहरे धामी मंत्रिमंडल से गायब दिख रहे हैं।
पांच बार बागेश्वर से विधायक रह चुके चंदन राम दास भले ही काफी अनुभवी राजनेता हों, लेकिन सरकार में वह एकदम नया चेहरा हैं, क्योंकि पहली बार उन्हें मंत्री की कुर्सी नसीब हो रही है। पांच बार ही हरिद्वार से विधायक रह चुके मदन कौशिक इस बार मंत्रिमंडल से बाहर हैं। उन्हें स्पीकर बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन अब बहुत मजबूती से इस पद के लिए ऋतु खंडूरी का नाम सामने आ चुका है। ऐसे में फिलहाल मदन कौशिक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे या फिर पार्टी हाईकमान ने उनके लिए कोई और भूमिका तय की है, इसका खुलासा आने वाले दिनों में ही हो पाएगा।
धामी मंत्रिमंडल मेें एकदम नए चेहरे के तौर पर सौरभ बहुगुणा अब सामने हैं। एचएन बहुगुणा के पोते और विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा दूसरी बार सितारगंज सीट से जीतकर आए हैं। भाजपा में हाशिये पर चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुुगुणा को उनके पुत्र का मंत्री बनना किसी पुरस्कार की तरह लग सकता है। पिछली विधानसभा के दौरान स्पीकर रहे प्रेम चंद्र अग्रवाल की मन की मुराद अब पूरी हो गई है। पिछली विधानसभा के दौरान ही एकाध मौकोें पर यह चर्चा गरम थी कि उन्हें स्पीकर की कुर्सी से हटाकर मंत्री की कुर्सी दी जा सकती है, लेकिन पांच साल वह स्पीकर ही बने रहे।
यशपाल आर्य और हरक सिंह रावत जैसे कुछ दिनों के मेहमानों से भाजपा को चुनाव से पहले झटका मिला था, लेकिन सुबोध उनियाल और रेखा आर्या के मंत्री बनने से साफ हैं कि पार्टी ने यह संदेश भी दे दिया है कि इन दोनों को भाजपा मेहमान नहीं, बल्कि अपने भरोसेमंद साथी के तौर पर देख रही है। सतपाल महाराज 2017 में जब बडे़ प्रोफाइल के बावजूद चौबट्टाखाल सीट से उम्मीदवार बने थे, तब उनके सीएम कैंडिडेट की संभावनाएं प्रबल मानी जाती थीं, मगर अब भाजपा की रीति-नीति के साथ आत्मसात करते हुए ऐसा लगता है कि जैसे उन्होंने हकीकत को स्वीकार कर लिया है। हकीकत ये ही है कि वे भाजपा सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री बतौर ही काम करेंगे। बामुश्किल जीत हासिल करने वाले डा धन सिंह रावत और जबरदस्त जीत हासिल करने वालेे गणेश जोशी का दोबारा मंत्री बनना यह साबित कर रहा है कि भाजपा अपने इन वफादार साथियों में बेहतर संभावनाएं देख रही हैं।
धामी मंत्रिमंडल में जगह बनाने से बिशन सिंह चुफाल, बंशीधर भगत और अरविंद पांडेय भी चूक गए हैं। इनमें चुफाल की डीडीहाट सीट को मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी के लिए देखा जा रहा है। ऐसे में चुफाल का समायोजन राज्यसभा या किसी अन्य जगह के लिए किया जा सकता है। बंशीधर भगत को मौका नहीं दिया गया है। उनकी स्थिति को देखकर कुछ-कुछ स्वर्गीय हरबंश कपूर याद आ रहे हैं, जिन्हें वरिष्ठ होने के बावजूद पूरे पांच साल भाजपा ने मंत्री नहीं बनाया था। अरविंद पांडेय ने यह मिथक तो तोड़ा कि शिक्षा मंत्री कभी अगला चुनाव नहीं जीतता, लेकिन फिलहाल यह मिथक कायम है कि शिक्षा मंत्री दोबारा मंत्री नहीं बनता। हालांकि मंत्रिमंडल में अभी तीन कुर्सियां खाली रखी गई हैं। देश, काल, परिस्थिति को देखते हुए भविष्य में इन कुर्सियों पर किसे विराजमान किया जाता है, यह देखने वाली बात होगी।

 

 

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