सिद्धू ने भी इस बैठक के बाद सुलह का संदेश देते हुए कहा कि कांग्रेस हाईकमान का फैसला स्वीकार है। गांधी परिवार पर उन्हें पूरा भरोसा है। सिद्धू की इस घोषणा के बाद उम्मीद की जा रही है कि पंजाब कांग्रेस में पिछले छह महीने से चल रहे घमासान का अब पटाक्षेप हो जाएगा।

Dhun Pahad Ki

हाल के दिनों में रूस, आस्‍ट्रेलिया, चीन और ताइवान ने अपने रक्षा बजट में अपार वृद्धि की है। इसके साथ अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्‍या दुनिया में एक बार फिर शस्त्रों की होड़ प्रारंभ हो गई है। क्‍या शस्‍त्रों की यह होड़ दुनिया में एक नए शीत युद्ध की दस्तक है। आखिर दुनिया के मुल्‍कों ने क्‍यों बढ़ाया अपना रक्षा बजट। इसके क्‍या है बड़े कारण। इसके क्‍या होंगे दूरगामी परिणाम। इसके लिए कौन है जिम्‍मेदार।

भारत की क्‍या है रणनीति। क्‍या रक्षा बजट में वृद्धि से दुनिया में गरीबी को दूर करने का सपना भी समाप्‍त होगा। इसके लिए कौन सी परिस्थितियां है जिम्मेदार। इस सभी सवालों का जवाब देंगे हमारे व‍िशेषज्ञ हर्ष वी पंत। इसके साथ दुनिया के 5 प्रमुख देशों के रक्षा बजट के बारे में जानेंगे। आइए जानते हैं कौन सा देश रक्षा बजट पर कितना खर्च करता है

प्रो. हर्ष वी पंत का कहना है कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद ऐसा लगा था की दुनिया में शस्त्रों की होड़ खत्‍म हो जाएगी। यह उम्‍मीद की जा रही थी कि इस पर सहज और स्‍वाभाविक रूप से विराम लगेगा। पूर्व सोवियत संघ के पतन के बाद दुनिया में शीत युद्ध का एक अध्‍याय समाप्‍त हो गया। तब यह उम्‍मीद जगी थी कि अब दुनिया के विकसित और विकासशील देश अब शस्त्रों की होड़ के बजाए मानव कल्‍याणकरी योजनाओं की ओर उन्‍मुख होंगे।

रूस और अमेरिका ने जिस तरीके से शस्‍त्रों की कटौती की‍ दिशा में कदम उठाए उससे यह सपना हकीकत में बदल रहा था। अब निश्चित रूप से यह प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण है कि अब विकासशील देशों का ध्‍यान रक्षा बजट के अलावा अपने देश में गरीबी को दूर करने, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर केंद्रित होगा। यह कहा जा सकता है कि बदलते अंतरराष्‍ट्रीय परिदृष्‍य ने एक बार फ‍िर दुनिया को मुश्किल में डाल दिया है।

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